Author(s)
संदीप कुमार यादव, डॉ. शिप्रा राय
- Manuscript ID: 140683
- Volume: 2
- Issue: 6
- Pages: 2749–2754
Subject Area: Arts and Humanities
Abstract
जौनपुर एक कृषि प्रधान जिला है जहाँ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना सीधे तौर पर खेती से जुड़ी है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि कैसे आधुनिक और सतत कृषि तकनीकें न केवल उत्पादकता बढ़ाती हैं, बल्कि समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों (छोटे किसान, महिलाएं और श्रमिक) को मुख्यधारा में लाकर एक समावेशी और संतुलित वातावरण तैयार करती हैं। सतत विकास मानव विकास के लक्ष्यों को पूरा करने का एक संगठित सिद्धांत है, यह प्राकृतिक प्रणालियों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकीय तंत्र की दक्षता को प्रदान करने की क्षमता को बनाए रखने पर जोर देता है । परंपरागत में किसान बैलों से जुताई, हाथ से बुवाई और हंसिये से कटाई करते थे । इसमें समय और शारीरिक श्रम बहुत अधिक लगता था जबकि प्रौद्योगिकी का विकाश, आधुनिक 'प्रमाणित बीज, सिंचाई की व्यवस्ता और हाइब्रिड बीजों का चलन है। यूरिया/DAP के साथ अब नैनो यूरिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Zinc, Boron) का प्रयोग बढ़ा है। ट्रैक्टर, रोटावेटर और कंबाइन हार्वेस्टर ने जौनपुर में श्रम की कमी को दूर किया है । जिस काम में पहले 10 दिन लगते थे, वह अब कुछ घंटों में हो जाता है। तकनीकी यंत्रों और महंगे बीजों के कारण खेती की लागत (Input Cost) बढ़ी है, लेकिन उत्पादन कई गुना बढ़ने से शुद्ध लाभ (Net Profit) में वृद्धि हुई है ।