Author(s)

डॉ प्रवीर चन्द्र दुबे

  • ISSN (P): 3139-8464
  • Manuscript ID: 141008
  • Volume: 2
  • Issue: 10
  • Pages: 1–8

Subject Area: Arts and Humanities

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम से २१वीं सदी की वैश्विक महाशक्ति प्रतिस्पर्धा के मुख्य केंद्र के रूप में उभरने वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जारी रणनीतिक संघर्षों का गहन विश्लेषण करना है। विशेष रूप से, यह शोध संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक द्वंद्व, चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड - QUAD) के रणनीतिक विकासक्रम और इसके प्रभाव का परीक्षण करता है1। इस अध्ययन के सैद्धांतिक आधार के रूप में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के नव-यथार्थवादी और नव-आक्रामक यथार्थवादी सिद्धांतों का प्रयोग किया गया है2। शोध से प्राप्त निष्कर्ष दर्शाते हैं कि चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'वैश्विक सुरक्षा पहल' (GSI) जैसी विस्तारवादी नीतियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक गंभीर 'सुरक्षा दुविधा' उत्पन्न कर दी है2। इसके उत्तर में क्वाड (अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया) का पुनरुद्धार क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में हुआ है6। अंत में, यह पत्र ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा अपनाई जा रही 'ग्रे-जोन' रणनीतियों से उत्पन्न होने वाली समकालीन सुरक्षा चुनौतियों और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के समक्ष चुनौतियों का मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।

Keywords
हिंद-प्रशांतक्वाड (QUAD)भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धानव-यथार्थवादसमुद्री सुरक्षाग्रे-जोन रणनीतिरणनीतिक स्वायत्तता।